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राष्ट्रीय किसान दिवस 2022

राष्ट्रीय किसान दिवस 2022

राष्ट्रीय किसान दिवस 2022 : नमस्कार दोस्तों आज हम एक ऐसे दिवस के बारे में बात करने वाले हैं उस दिवस का नाम राष्ट्रीय किसान दिवस के नाम से है राष्ट्रीय किसान दिवस क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय किसान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय किसान दिवस मनाने का प्रमुख कारण राष्ट्रीय किसान दिवस कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय किसान दिवस का इतिहास राष्ट्रीय किसान दिवस का महत्व आदि बिंदुओं पर आज हम नीचे विस्तार से बात करने वाले हैं

राष्ट्रीय किसान दिवस 2022 – 

23 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय किसान दिवस इतिहास महत्त्व ? भारत में हर साल राष्ट्रीय किसान दिवस 23 दिसंबर को मनाया जाता है। भारत के 5वें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के रूप में किसान दिवस मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हापुड़ में हुआ। इन्होनें अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का हर संभव प्रयास किया और कई कृषि बिल पारित किये गए। किसानों के लिए इनके अतुलनीय योगदान के लिए साल 2001 से 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाने लगा। आइये जानते है

भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले किसानों को आज का दिन समर्पित है। आज ही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन भी है। जो किसानों के हितैषी थे और उनके सम्मान में ही आज के दिन को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें किसानों के मसीहा के तौर पर भी जाना जाता है।

किसान समाज की रीढ़ हैं। वे लोग हैं जो घड़ी और साल भर काम करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग भूखे न मरें लेकिन वे दिन में 2 वर्ग भोजन के लिए संघर्ष करते हैं। इसलिए किसानों को समाज में उनके योगदान के लिए मदद और पुरस्कृत करने के लिए जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए किसान दिवस हर साल मनाया जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस हर साल विशेष रूप से उन राज्यों में मनाया जाता है जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में सक्रिय रूप से खेती करते हैं।

राष्ट्रीय किसान दिवस का इतिहास –

इस दिन का आयोजन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान में किया जाता हैं. वो देश के पाँचवे प्रधानमंत्री थे. हालांकि उन्होंने केवल 28 जुलाई 1979 से लेकर 14 जनवरी 1980 तक ये पदभार सम्भाला था, लेकिन इस दौरान ही उन्होंने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बहुत सी नीतियाँ बनाई थी. चौधरी चरण सिंह की बहुत सी नीतियाँ ना केवल किसानों के हितों की रक्षा करती थी बल्कि उन्हें एकजुट करके जमीदारों से लड़ने को प्रेरित भी करती थी. उन्होंने “जय जवान-जय किसान” का वास्तविक रूप में अनुसरण किया था. वो लेखक थे और उन्होंने अपने लेखन के हुनर का उपयोग किसानों की समस्याओं और उनके समाधान की किताबों को लिखने में उपयोग किया था. और इस तरह उन्होंने कृषकों के जीवन स्तर को सुधारने के बहुत प्रयास किये थे. देश के आम किसानों के बीच सदा लोकप्रिय रहे इस नेता की जयंती को ही किसान दिवस के रूप में मनाना निर्धारित किया गया हैं. ये बात हर कोई जानता हैं कि किसान ही देश का मेरुदंड हैं इसलिए इनके हितों की रक्षा करना बेहद आवश्यक हैं. इस तरह किसान पृष्ठभूमि के चरण सिंह के सम्मान में मनाया जाने वाला ये दिन भारतीयों के मन में किसानों के लिए सम्मान को बढाता है

राष्ट्रीय किसान दिवस क्यों मनाया जाता हैं –

हर साल भारत के सभी राज्यों में राष्ट्रीय किसान दिवस का आयोजन किया जाता हैं, उनमें भी वो राज्य जहां सबसे ज्यादा कृषि होती हैं, वहाँ ये दिवस कोई उत्सव से कम नही होता हैं जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में इस दिवस को लेकर बहुत उत्साह देखा जाता हैं. किसान समुदाय और ग्रामीण वर्ग के कई सदस्य मिलकर कृषि आधारित कार्यक्रम का आयोजन करते हैं. कई वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज जैसे कार्यक्रमों से कृषि कार्य संबंधित जागरूकता लाने की कोशिश की जाती हैं. इस दौरान किसानों से संबंधित कई मुदों पर चर्चा की जाती हैं, किसानो के प्रतिनिधि अपनी समस्याओं और मुद्दों को अभिव्यक्त कर पाते हैं, इस दिन किसानों के विकास के लिए काम करने वालों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया जाता हैं

राष्ट्रीय किसान मसीहा का योगदान –

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में हुआ था। चौधरी चरण सिंह के पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था। चौधरी साहब ने किसानों, पिछड़ों और ग़रीबों की राजनीति की। उन्होंने खेती और गाँव को महत्व दिया। वह ग्रामीण समस्याओं को गहराई से समझते थे और अपने मुख्यमंत्रित्व तथा केन्द्र सरकार के वित्तमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने बजट का बड़ा भाग किसानों तथा गांवों के पक्ष में रखा था। वे जातिवाद को ग़ुलामी की जड़ मानते थे और कहते थे कि जाति प्रथा के रहते बराबरी, संपन्नता और राष्ट्र की सुरक्षा नहीं हो सकती है।

राष्ट्रीय किसान दिवस का महत्व –

भारत मुख्य रूप से गाँवों की भूमि है, जहाँ की अधिकांश आबादी कृषि किसानों की आय का मुख्य स्रोत है। हालांकि, इतने लोगों के लिए जीवन का सबसे प्रमुख साधन होने के बावजूद, बहुत से लोग उन समस्याओं के बारे में नहीं जानते हैं जो किसानों का सामना करती हैं। देश के इस संप्रदाय के बारे में आवश्यक जानकारी से लोग अंजान रहते हैं। इसलिए समारोह इन मुद्दों के बारे में लोगों को शिक्षित करने पर काम करते हैं, और कृषि क्षेत्र की नवीनतम सीखों के साथ किसानों को सशक्त बनाने पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। किसान दिवस पर किसानों और खेती से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कई बहस, मंच, चर्चाएँ, क्विज़ और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। किसान दिवस पर यहां कुछ लोकप्रिय उद्धरण दिए गए हैं, जिन्हें आप समाज के किसानों के योगदान को समझने के लिए देश के नागरिकों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए अपने दोस्तों, सहकर्मियों और परिवार को भेज सकते हैं।

राष्ट्रीय किसान दिवस का उद्देश्य –

किसानों के बिना जिन्दगी और दुनिया का अस्तित्व सोचा भी नही जा सकता हैं,ये बहुत ही खुश नसीबी की बात हैं कि हमारे समाज का एक वर्ग ऐसा हैं जो हमारे भरण-पोषण का काम देखता हैं और इसके बदले में यदि हम उनके अधिकारों की रक्षा कर पाए, उनका जीवन स्तर ऊपर उठा सके, तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता. इसलिए भी किसान दिवस मनाना जरूरी हैं. जिससे कि हम तक फल,सब्जियां और धान जैसी मूलभूत वस्तुएं पहुँचाने वाले वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके. वास्तव में कृषि के लिए आवश्यक इन्वेस्टमेंट, उपकरण और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाने के लिए किसान वर्ग का शिक्षित होना भी जरूरी हैं. सरकार किसानों के लिये समय-समय पर कई तरह की योजनाएं बनाती रहती हैं और उनको लाभ देने के लिये बहुत से कृषि कार्यक्रम भी आयोजित करती हैं. लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी कई बार किसानों तक आवश्यक जानकारी नहीं पहुँच पाती है, इसलिए किसी एक दिन पर किसानों को उनके सम्मान के साथ उनके हितों की जानकारी देना ही किसान दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य हैं

राष्ट्रीय किसान दिवस कैसे मनाया जाता है –

किसानों को प्रोत्साहित करने और देश में उनके योगदान का जश्न मनाने के लिए राष्ट्रीय किसान दिवस पर देश भर में कई आयोजन किए जाते हैं। इस दिन किसानों के लिए कई सेमिनार जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित किए जाते हैं। जिसमें कृषि अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक किसानों को खेती करने करने के नए-नए तरीके और देश में फसलों के नवीनतम आकंड़ो को सांझा उनके साथ सांझा करते हैं। इसके अलावा कई सेमिनार विभिन्न कृषि विज्ञान स्थानों और कृषि ज्ञान स्थलों पर आयोजित किए जाते हैं। इन सभी सेमिनारों में किसानों को कृषि बीमा योजनाओं और भारत सरकार की अन्य योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही सरकार भी इस दिन किसानों के हित के लिए नई नीतियों की घोषणा करती है। लेकिन दुर्भाग्यवश कई योजनाओं का किसान लाभ तक नहीं उठा पाते।

राष्ट्रीय किसान दिवस पर कविता –

जिनके अनाज के भंडार हैं
पर खाने को दाना नहीं
जिनके आँगन में दुग्ध बहे
पर उसने कभी चखा नहीं

मेहतन ही उसकी ताकत हैं
फिर भी वो आज भिखारी हैं
अनाज का हैं वो दाता
फिर भी सोता भूखा हैं

वह मेहनत की ही खाता हैं
पर पृकृति का गुलाम हैं
आस लगाये वो आसमान निहारे
लेकिन भाग्य में उसके शाम हैं

साहूकार ने रही सही
सांसे भी उससे छीन ली
सियासी और कालाबजारी ने
उसकी जिन्दगी दूभर करी

फिर भी वो उठता हैं
मेहनत करते जाता हैं
एक दिन आएगा फिर से
जब किसान ही लहरायेगा
कब तक रूठेगी तू पृथ्वी
तुझे वो मेहनत से ही मनायेगा

Conclusion:- दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने इस विटामिन की कमी से आते हैं सफेद बाल, कम उम्र में बन जाएंगे बूढ़े के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इसलिए हम उम्मीद करते हैं, कि आपको आज का यह आर्टिकल आवश्यक पसंद आया होगा, और आज के इस आर्टिकल से आपको अवश्य कुछ मदद मिली होगी। इस आर्टिकल के बारे में आपकी कोई भी राय है, तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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